नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अमेरिकी सैन्य क्षमता को गंभीर चुनौती दी है। खासतौर पर देश की उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम पैट्रियट और THAAD के स्टॉक तेजी से खत्म हो रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका ने 2400 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें फायर कर दी हैं। सिर्फ पहले चार-पांच दिनों में ही 943 पैट्रियट इंटरसेप्टर दागे गए, जिसकी अनुमानित लागत 2.4 बिलियन डॉलर (करीब 20,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा है। प्रत्येक पैट्रियट इंटरसेप्टर की कीमत लगभग 3-4 मिलियन डॉलर है।THAAD सिस्टम पर भी भारी असर पड़ा है।
THAAD इंटरसेप्टर स्टॉक 40 प्रतिशत तक घट गया
रिपोर्ट्स बताती हैं कि युद्ध में अमेरिका का THAAD इंटरसेप्टर स्टॉक 40 प्रतिशत तक घट गया है। कुछ अनुमानों में यह नुकसान और भी ज्यादा बताया जा रहा है। THAAD इंटरसेप्टर की कीमत 12-15 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट है और इसका सालाना उत्पादन बहुत सीमित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज रफ्तार से इंटरसेप्टर खर्च होने के कारण स्टॉक को पूरी तरह बहाल करने में कई साल लग सकते हैं। वर्तमान उत्पादन दर को देखते हुए पैट्रियट और THAAD दोनों की भरपाई में लंबा समय लगेगा।
ईरान की तरफ से सस्ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की भारी बौछार के कारण अमेरिका को महंगी डिफेंस मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो एक असमान लड़ाई साबित हो रही है।यह स्थिति अमेरिकी सेना के लिए चिंता का विषय बन गई है।
मिसाइल डिफेंस की क्षमता और कमजोर हो सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो मिसाइल डिफेंस की क्षमता और कमजोर हो सकती है। पेंटागन अब स्टॉक की कमी को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने और अन्य देशों से मदद लेने के विकल्प तलाश रहा है। ईरान-अमेरिका संघर्ष ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में महंगे डिफेंस सिस्टम कितनी तेजी से खत्म हो सकते हैं।
