नई दिल्ली। इजरायल ने ईरान पर अपने सबसे बड़े हवाई हमलों की शुरुआत की, जिसने ईरान की ऊर्जा और सैन्य संरचना को व्यापक नुकसान पहुंचाया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत इन हमलों को और तीव्र करने की चेतावनी दी, जिसमें तेहरान, नतांज और इस्फहान जैसे शहरों में परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरानी मीडिया ने बताया कि दक्षिणी बुशहर प्रांत में साउथ पार्स गैस क्षेत्र में आग लगने से 12 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन ठप हो गया। इसके अलावा, शाहरान तेल डिपो और तेहरान के एक 14 मंजिला आवासीय भवन पर हमले में 60 लोग मारे गए, जिनमें 20 बच्चे शामिल थे। कुल 78 लोगों की मौत की खबर है।
लड़ाकू विमानों से 150 से ज्यादा ठिकानों पर हमला
इजरायल ने 200 से अधिक लड़ाकू विमानों से 150 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कई वरिष्ठ ईरानी जनरल और नौ परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 90वें मिनट में है और इसे रोकने के लिए और हमले किए जाएंगे। जवाब में, ईरान ने 200 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से तेल अवीव और यरुशलम सहित इजरायली शहरों पर हमला किया। इजरायल ने अमेरिकी रक्षा प्रणालियों की मदद से अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन तीन लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए।
सहयोगी देशों की सैन्य चौकियां भी निशाने पर होंगी
ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल के सहयोगी देशों की सैन्य चौकियां भी निशाने पर होंगी। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल पर गाजा में नरसंहार का ध्यान हटाने का आरोप लगाया। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने नतांज हमले से रेडियोधर्मी और रासायनिक प्रदूषण की चेतावनी दी। अमेरिका ने हमलों में अपनी गैर-भागीदारी की पुष्टि की, जबकि रूस और चीन ने इजरायल की निंदा की। भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देते हुए स्थिति पर नजर रखने की बात कही। यह संघर्ष पूर्ण युद्ध की आशंका को बढ़ा रहा है।
