नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज उपभोक्ताओं की प्रमुख समस्याओं को उठाया, जो देश के लगभग 90% मोबाइल यूजर्स (करीब 125 करोड़) को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि रिचार्ज की वैधता खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल बंद होना स्वाभाविक है, लेकिन इनकमिंग कॉल और एसएमएस भी रोकना टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है। इससे यूजर्स आपात स्थिति में संपर्क से कट जाते हैं, बैंक OTP, जॉब अपडेट या इमरजेंसी मैसेज नहीं मिल पाते, जो संचार के अधिकार का उल्लंघन है।
राघव चड्ढा ने तीन मुख्य मांगें रखीं: पहली, रिचार्ज खत्म होने के बाद भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और एसएमएस चालू रहें; दूसरी, नंबर री-असाइन होने से पहले तीन साल की ग्रेस पीरियड हो; और तीसरी, केवल इनकमिंग के लिए सस्ते प्लान उपलब्ध हों। उन्होंने जोर दिया कि मोबाइल आज लग्जरी नहीं, बल्कि आम नागरिक की आवश्यकता है, इसलिए कंपनियों को पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए।
‘मासिक’ रिचार्ज प्लान को भी ‘स्कैम’ करार दिया
उन्होंने 28 दिनों के ‘मासिक’ रिचार्ज प्लान को भी ‘स्कैम’ करार दिया। एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन x 13 = 364 दिन की वैधता के कारण उपभोक्ताओं को साल भर में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, यानी एक अतिरिक्त रिचार्ज का बोझ। उनका तर्क है कि अगर प्लान को मासिक कहा जाता है, तो वैधता कैलेंडर महीने (30-31 दिन) के अनुसार होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों को अनावश्यक अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े।
यह मुद्दा राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया गया और TRAI से हस्तक्षेप की मांग की गई। राघव चड्ढा ने इसे उपभोक्ता अधिकारों और गरीब, बुजुर्ग तथा कम आय वाले लोगों के लिए बड़ी समस्या बताया, क्योंकि वे बेसिक फोन पर निर्भर रहते हैं और रिचार्ज न कर पाने पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाते हैं।
