नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के एक बयान ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। 9 जुलाई, 2025 को नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह में भागवत ने कहा कि 75 वर्ष की आयु होने पर नेताओं को सक्रिय भूमिका छोड़कर नई पीढ़ी को अवसर देना चाहिए।
उन्होंने यह बात आरएसएस विचारक मोरोपंत पिंगले के हवाले से कही, जिन्होंने कहा था, “75 साल का शॉल ओढ़ने का मतलब है कि अब रुक जाइए और दूसरों को काम करने दीजिए।” यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भागवत दोनों सितंबर 2025 में 75 साल के हो जाएंगे।
कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ छिपा संदेश बताकर कसा तंज
कांग्रेस ने इस बयान को मोदी के खिलाफ ‘छिपा संदेश’ बताकर तंज कसा। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, “बेचारे अवार्ड-जीवी प्रधानमंत्री! विदेश से लौटते ही सरसंघचालक ने याद दिलाया कि 17 सितंबर 2025 को वे 75 के हो जाएंगे। लेकिन पीएम भी कह सकते हैं कि भागवत 11 सितंबर को 75 के होंगे। एक तीर, दो निशाने!” कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं को 75 की उम्र में रिटायर किया था, अब क्या वे खुद इस नियम का पालन करेंगे?
भाजपा ने इन अटकलों को खारिज किया
भाजपा ने इन अटकलों को खारिज किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2023 में ही स्पष्ट किया था कि भाजपा के संविधान में रिटायरमेंट की कोई उम्र सीमा नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी 2029 तक नेतृत्व करेंगे। भागवत के बयान को भाजपा ने सामान्य टिप्पणी करार दिया, न कि मोदी के लिए कोई संदेश। इस बीच, विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने में जुटा है, जिससे सियासी माहौल गरमाया हुआ है।
