नई दिल्ली। भीषण गर्मी अब स्थानीय समस्या नहीं रही है। भारत के उत्तर प्रदेश के बांदा जैसे इलाकों से लेकर यूरोप के ब्रिटेन और फ्रांस तक जलवायु परिवर्तन व अल-नीनो का घातक मिश्रण सक्रिय है। फ्रांस में अकेले 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 2 और 4 साल के दो बच्चे भी शामिल हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो इस बार गर्म हवाओं को उत्तर की ओर खींच रहा है।
फ्रांस के बोर्डो में तापमान 41.9 डिग्री पहुंच गया, जबकि ब्रिटेन में जून का रिकॉर्ड टूटने वाला है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे ‘ओमेगा ब्लॉक’ नाम दिया है, जो सहारा मरुस्थल से गर्म हवा यूरोप ले जा रहा है। स्पेन, इटली और बेल्जियम भी इसकी चपेट में हैं। ब्रिटेन में तापमान 39 डिग्री तक पहुंच सकता है। कई जगहों पर स्कूलों के समय में बदलाव और छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
बच्चों-बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
फ्रांस में बच्चों को गर्म कार में छोड़ने से दो मौतें हुईं, जबकि बुजुर्गों की मौत स्वास्थ्य जटिलताओं से हुई। डूबने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। इटली में 12 शहरों में रेड अलर्ट जारी है। बेल्जियम में छतों पर चिड़ियां गर्मी से घोंसलों से कूद रही हैं। विश्व मौसम संगठन के अनुसार, यूरोप दुनिया के अन्य हिस्सों से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है।
कार्बन उत्सर्जन कम करने की जरूरत
अल-नीनो प्राकृतिक है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसे ज्यादा खतरनाक बना रहा है। बांदा में भी लू और हीटस्ट्रोक से मौतें हुई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बेहतर पूर्वानुमान, गर्मी से बचाव के इंतजाम और कार्बन उत्सर्जन घटाना जरूरी है। यह गर्मी भविष्य के और गंभीर मौसम पैटर्न की चेतावनी है – बांदा हो या ब्रिटेन, कोई भी देश अकेला नहीं है।
