मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर दुनिया भर के रियल एस्टेट मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका से लेकर दुबई और भारत तक, खरीदारों का भरोसा डगमगा गया है और निवेशक सतर्क हो गए हैं।
अमेरिका: रिकवरी पर ब्रेक
2026 की शुरुआत में अमेरिकी हाउसिंग मार्केट रिकवरी की राह पर था, लेकिन युद्ध ने इस रफ्तार को थाम दिया है। बढ़ती अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने मॉर्गेज रेट्स को महंगा कर दिया है। संघर्ष शुरू होने के पहले ही हफ्ते में होम लोन आवेदनों में 5% की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वर्ग के खरीदार ऊंची ईएमआई के डर से घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं।
दुबई: ‘सेफ हेवन’ की चमक फीकी
दुबई, जिसे लंबे समय से निवेशकों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, इस बार दबाव में है। DXB Interact के आंकड़ों के मुताबिक 28 फरवरी से 22 मार्च के बीच केवल 8,157 डील हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 12,196 थी। यानी करीब 33% की गिरावट। लग्जरी विला और वॉटरफ्रंट प्रॉपर्टीज की कीमतों में भी 4-5% तक की मामूली कटौती देखी जा रही है। विशेषज्ञ इसे ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति मान रहे हैं।
भारत: बिक्री में गिरावट, इन्वेंट्री बढ़ी
भारतीय रियल एस्टेट भी इस संकट से अछूता नहीं रहा। ANAROCK की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में देश के टॉप 7 शहरों में घरों की बिक्री पिछली तिमाही की तुलना में 7% घटी है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निर्माण लागत बढ़ गई है।
– चेन्नई में सबसे ज्यादा 18% की गिरावट
– मुंबई और बेंगलुरु में 5-6% की कमी
दिलचस्प बात यह है कि बिक्री कम होने के बावजूद नई लॉन्चिंग में 2% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे अनसोल्ड इन्वेंट्री 6 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई है।
एनआरआई निवेशक पीछे हटे
मध्य पूर्व में रहने वाले एनआरआई भारतीय रियल एस्टेट के बड़े खरीदार हैं। लेकिन युद्ध के बाद उन्होंने नए निवेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इससे भारतीय बाजार में दबाव और बढ़ गया है।
