अयोध्या राम मंदिर चंदा घोटाला केस में पहली FIR दर्ज, समझें सभी आरोपियों की क्या थी भूमिका

अयोध्या राम मंदिर चंदा घोटाला केस में पहली FIR दर्ज

नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली FIR दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित SIT की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हुई। FIR में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अज्ञात आरोपी भी जांच के दायरे में हैं। SIT अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और लेन-देन की जांच कर रही है।

FIR में नामजद मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू दानपात्रों की निगरानी और उन्हें बेसमेंट पहुंचाने का काम देखते थे। लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा कैश काउंटिंग टीम में थे। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे। करुणेश पांडेय, मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला चढ़ावे की रकम को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया में शामिल थे। आरोप है कि इन लोगों ने चढ़ावे की सुरक्षा, परिवहन और गिनती के विभिन्न चरणों में हेराफेरी की।

आरोप और सबूत

आरोपियों पर चोरी, गबन और साजिश के आरोप लगे हैं। जांच में लवकुश मिश्रा के घर से 12 लाख रुपये और मनीष कुमार यादव के घर से 36 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे का गबन कर अयोध्या और आसपास के जिलों में संपत्तियां बनाई गईं। ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने यह शिकायत दर्ज कराई है। मामले में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई हो रही है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

वर्तमान स्थिति

SIT की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। चंपत राय जैसे वरिष्ठ लोगों का नाम FIR में नहीं है। सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला राम मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है, जिस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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