नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के 24वें दिन होर्मुज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद हो चुका है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और एलएनजी गुजरता है। इस बीच ईरान ने रणनीतिक कदम उठाते हुए कुछ चुनिंदा तेल टैंकरों को सुरक्षित पार कराने के लिए प्रति जहाज 20 लाख डॉलर (लगभग 18 करोड़ रुपये) का भारी शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। ईरानी सांसद अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने कहा कि यह शुल्क ईरान की ताकत को दर्शाता है और युद्ध की लागत पूरा करने का तरीका है।
लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में एक टैंकर ऑपरेटर द्वारा ईरान को यह राशि भुगतान करने का जिक्र है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट दुश्मन देशों (अमेरिका और इजरायल) तथा उनके समर्थकों के जहाजों के लिए बंद है, लेकिन बाकी देशों के लिए खुला रखा गया है। ईरान ने एक ‘सुरक्षित गलियारा’ बनाया है, जहां से जहाजों को अनुमति मिल रही है, लेकिन इसके लिए पहले अप्रूवल और भारी फीस जरूरी है।
रूट सिर्फ विरोधियों के लिए बंद: ईरान
ईरानी विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों ने कहा कि यह रूट सिर्फ विरोधियों के लिए बंद है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जबकि ईरान ने धमकी दी कि उसके बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ तो होर्मुज पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।इस वसूली और स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल-गैस संकट गहरा गया है। कई देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, भारत में एलपीजी संकट पैदा हो गया है, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट बुरी तरह से प्रभावित
शिपिंग कंपनियां ईरान पर प्रतिबंधों के कारण लेन-देन में मुश्किलें झेल रही हैं, और युद्ध-जोखिम बीमा की लागत भी बढ़ गई है। ईरान इस शुल्क से युद्ध की आर्थिक जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है। समग्र रूप से होर्मुज संकट ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अगर तनाव बढ़ता रहा तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जबकि कोई समझौता या राहत होने पर स्थिति संभल सकती है। निवेशक और देश इस चोक पॉइंट पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यहां से दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
