नई दिल्ली। अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान तैयार कर रहा है। पेंटागन ने ईरान पर ‘फाइनल ब्लो’ की रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसमें हवाई हमलों के साथ-साथ जमीनी छापेमारी और सीधे सैनिक अभियान भी शामिल हैं। यह कोई लंबा युद्ध नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों तक चलने वाले तेज और सटीक ऑपरेशन का प्लान है।
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के अंदर विशेष बलों के जरिए जमीनी अभियान चला सकती है। इसमें ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और समुद्री ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिका पहले ही मध्य पूर्व में हजारों सैनिक और मरीन कमांडो तैनात कर चुका है, ताकि जरूरत पड़ते ही ऑपरेशन शुरू किया जा सके।
योजना के हैं चार बड़े टारगेट
योजना में चार बड़े टारगेट बताए जा रहे हैं। पहला, खार्ग द्वीप पर कब्जा या ब्लॉकेड। यह ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। अगर इस पर कब्जा हो गया तो ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है। दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण। लारक द्वीप पर हमला कर समुद्री रास्ते को सुरक्षित करना शामिल है, ताकि ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना न बना सके। तीसरा,परमाणु ठिकानों पर छापेमारी, जिसमें अबू मौसा द्वीप और आसपास के इलाकों में उच्च संवर्धित यूरेनियम जब्त करने की योजना है। चौथा, ईरानी तेल ले जा रहे जहाजों को समुद्र में रोकना।
जमीनी अभियान आसान नहीं होगा
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है और अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी अभियान आसान नहीं होगा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) मजबूत है और जवाबी हमले कर सकता है।
अभी ये योजनाएं कागज पर हैं, लेकिन अमेरिका की सैन्य तैनाती और USS त्रिपोली जैसे युद्धपोतों की मौजूदगी से तनाव चरम पर है। दुनिया की नजरें अब अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर ये प्लान लागू हुआ तो पश्चिम एशिया में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और सुरक्षा पर पड़ेगा।
