नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। अब UPI, नेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट पर हर डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य हो जाएगा। सिर्फ एक पिन या एक OTP से पेमेंट नहीं होगा। आपकी मेहनत की कमाई अब दोहरी सुरक्षा कवच में सुरक्षित रहेगी।
RBI ने ये नियम बढ़ते साइबर फ्रॉड, फिशिंग अटैक और अनधिकृत ट्रांजेक्शन को रोकने के लिए लाए हैं। नए नियमों के तहत हर ट्रांजेक्शन में कम से कम दो अलग-अलग ऑथेंटिकेशन फैक्टर लगेंगे। इनमें से एक फैक्टर डायनेमिक (ट्रांजेक्शन के समय जेनरेट होने वाला) होना अनिवार्य है। मतलब अगर कोई चोर आपका स्टैटिक पिन चुरा भी ले, तो बिना दूसरे फैक्टर (जैसे नया OTP, फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) के ट्रांजेक्शन पूरा नहीं हो सकेगा।
विदेशी पेमेंट्स के लिए 1 अक्टूबर से होंगे शुरू
ये नियम घरेलू ट्रांजेक्शन के लिए 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, जबकि विदेशी या क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स के लिए 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे। बैंक, कार्ड नेटवर्क और फिनटेक कंपनियां (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay) यूजर्स को कई विकल्प देंगी- जैसे OTP + पिन, बायोमेट्रिक्स + डिवाइस बाइंडिंग या टोकन आधारित सिस्टम। शुरुआत में एक एक्स्ट्रा स्टेप लग सकता है, लेकिन सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी।
नियमों की लापरवाही पर नुकसान ग्राहक का नहीं
RBI का साफ निर्देश है कि अगर नियमों की लापरवाही से फ्रॉड होता है, तो पूरा नुकसान बैंक या सर्विस प्रोवाइडर को उठाना पड़ेगा, ग्राहक को नहीं। इस बदलाव से डिजिटल इंडिया सिर्फ तेज नहीं, बल्कि सुपर सेफ भी बन रहा है। यूजर्स को सलाह है कि अपने ऐप्स को अपडेट रखें, बायोमेट्रिक्स चालू करें और किसी भी शक पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
