नई दिल्ली। अमेरिकी नौसेना का एम्फिबियस असॉल्ट शिप यूएसएस त्रिपोली (LHA-7) 2,200 से ज्यादा मरीन सैनिकों और एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स, एमवी-22 ओस्प्रे तथा एमएच-60 हेलीकॉप्टर्स के साथ हिंद महासागर में पहुंच चुका है। यह जहाज जापान के ओकिनावा से 11 मार्च को रवाना हुआ था और अब श्रीलंका के दक्षिण में स्थित है, जहां से यह उत्तर अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। सैटेलाइट इमेजरी और मैरीटाइम ट्रैकिंग डेटा से पुष्टि हुई है कि जहाज सिंगापुर के पास मलक्का स्ट्रेट से गुजरा और अब भारत के करीब दक्षिणी हिंद महासागर में है।
यह यूनिट 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) है, जो जमीनी और हवाई ऑपरेशंस में माहिर है। जहाज 22-23 मार्च तक मिडिल ईस्ट थिएटर में पहुंच सकता है, जहां यह यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ जुड़ेगा। यह तैनाती ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के 21वें दिन हुई है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था। मुख्य फोकस होर्मुज स्ट्रेट पर है, जहां दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है।
ईरान ने युद्ध शुरू होते ही इस रूट को ठप कर दिया
ईरान ने युद्ध शुरू होते ही इस रूट को ठप कर दिया, पश्चिमी जहाजों पर हमले की धमकी दी और मनमाना टैक्स वसूला (एक टैंकर से 20 लाख डॉलर तक)। यूएसएस त्रिपोली का आना होर्मुज को ईरान के कब्जे से छुड़ाने और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा के लिए है। अमेरिका ईरान के 950 पाउंड से ज्यादा उच्च संवर्धित यूरेनियम को भी सुरक्षित करना चाहता है, जो बमबारी के मलबे में दबा है। अगर मरीन तैनात हुए तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा जमीनी कदम होगा, जिसमें ईरान के छोटे द्वीपों पर कब्जा कर शिपिंग रूट सुरक्षित किए जा सकते हैं।
ट्रंप ने मीडिया से इनकार किया कि वे सेना भेज रहे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से इनकार किया कि वे सेना भेज रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं कहीं भी सेना नहीं भेज रहा हूं। अगर भेज भी रहा होता, तो किसी को बताता नहीं।” लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप हजारों सैनिकों की तैनाती पर गंभीर विचार कर रहे हैं। ट्रंप शुरू से अड़े हैं कि ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी होर्मुज की सुरक्षा पर जोर दिया है। ट्रंप सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की अपील कर रहे हैं, लेकिन अभी कोई बड़ा जवाब नहीं आया।
ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा पहले ही तबाह
ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा पहले ही तबाह हो चुका है, इसलिए अमेरिका के लिए जोखिम कम है।रणनीतिक रूप से यह कदम युद्ध को नई दिशा दे सकता है। होर्मुज सुरक्षित होने से तेल कीमतें स्थिर हो सकती हैं, लेकिन युद्ध का विस्तार भी संभव है। श्रीलंका ने अमेरिकी फाइटर जेट्स को लैंडिंग नहीं दी, जबकि ईरान ने एफ-35 गिराने का दावा किया है। कुल मिलाकर यूएसएस त्रिपोली का हिंद महासागर में पहुंचना ट्रंप की ईरान रणनीति का हिस्सा है, जहां अमेरिका अब हवाई हमलों से आगे जमीनी ऑपरेशंस की तैयारी दिखा रहा है। आने वाले हफ्ते निर्णायक हो सकते हैं।
