नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राह पर चलते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रखने जा रहे हैं। सोमवार (6 अप्रैल 2026) को दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मामले में केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से रिक्यूजल (खुद को हटाने) की मांग पर व्यक्तिगत रूप से बहस करेंगे।
मामला दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के कथित घोटाले से जुड़ा है। केजरीवाल और अन्य पूर्व आरोपियों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए रिक्यूजल अर्जी दायर की है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भी लिखकर मामले को उनकी एकल पीठ से हटाकर किसी अन्य बेंच को सौंपने का अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अब केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश होकर अपनी बात रखेंगे।
शराब घोटाला मामले में केजरीवाल समेत 23 आरोपित बरी
यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पहले कोर्ट में खुद बहस कर चुकी हैं। केजरीवाल उनके बाद दूसरे प्रमुख विपक्षी नेता हैं जो खुद कोर्ट में दलील रखने जा रहे हैं। AAP सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल की रणनीति निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की है। शराब घोटाले में निचली अदालत ने केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था, जिसके खिलाफ ईडी और सीबीआई हाईकोर्ट पहुंची हैं।
केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की पिछली टिप्पणियों और फैसलों पर आपत्ति जताई है। कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया था।केजरीवाल के इस कदम को उनकी कानूनी लड़ाई को और मजबूत बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम विपक्षी एकजुटता और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास का संदेश भी दे रहा है। सुनवाई के नतीजे पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
