नई दिल्ली। सोमवार को भारतीय मुद्रा बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान रुपया 95.20 से 95.22 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड है।
दिनभर में रुपए में करीब 0.3 प्रतिशत की कमजोरी आई। शुरुआत में कुछ मजबूती दिखी, लेकिन बाद में दबाव बढ़ने से यह गिरावट दर्ज हुई। रिजर्व बैंक द्वारा हाल में बैंकों की विदेशी मुद्रा पोजिशन पर सख्ती करने के बावजूद केवल अस्थायी राहत मिली।
डॉलर के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट
इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य कारण वैश्विक संकट हैं। ईरान से जुड़े युद्ध की अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और मजबूत डॉलर का दबाव रुपये पर भारी पड़ रहा है। इस साल जनवरी से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात अभी भी रुपये के खिलाफ बने हुए हैं। अगर वैश्विक तनाव बढ़ा तो 100 के स्तर तक जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट
शेयर बाजार पर भी इसका बुरा असर दिखा। निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और मार्च 2020 के बाद यह सबसे खराब मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। आम आदमी पर इसका सीधा प्रभाव पेट्रोल-डीजल, आयातित सामान और महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है। RBI और सरकार अब आगे क्या कदम उठाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
