ईरान में अमेरिकी सेना का हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका ने इसे अपने सैन्य इतिहास की सबसे साहसी घटनाओं में से एक बताया है, जबकि ईरान ने इस पर गंभीर संदेह जताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर गर्व से घोषणा की: “हमने उसे बचा लिया!” और इस मिशन को एक ऐतिहासिक ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ करार दिया। लेकिन ईरान का कहना है कि यह ऑपरेशन केवल पायलट को बचाने के लिए नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनके एनरिच्ड यूरेनियम पर कब्ज़ा करने की मंशा छिपी हो सकती है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस ऑपरेशन में कई असंगतियां हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस जगह अमेरिकी विमान गिरा था और जहां रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ, दोनों के बीच लगभग 70–150 किलोमीटर की दूरी थी। उनका दावा है कि यह भौगोलिक अंतर संकेत देता है कि ऑपरेशन का असली उद्देश्य कुछ और हो सकता है।
अमेरिकी F‑15E स्ट्राइक ईगल विमान 3 अप्रैल को ईरान के कोहगिलुयेह और बोयेर-अहमद प्रांत में गिरा था। पायलट को तुरंत बचा लिया गया, लेकिन हथियार प्रणाली अधिकारी (WSO) लगभग 48 घंटे तक लापता रहा। अंततः अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने उसे जाग्रोस पर्वत क्षेत्र से सुरक्षित निकाला।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस मिशन में 200 से अधिक अमेरिकी कमांडो, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और विशेष इकाइयाँ शामिल थीं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने नकली बीकन और झूठी सूचनाओं का इस्तेमाल कर उनकी सेना को गुमराह किया।
ईरान का कहना है कि चाहे उद्देश्य जो भी रहा हो, यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए एक “शर्मनाक विफलता” साबित हुआ। वहीं, इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है — अब तक 29 विमान गिराए जा चुके हैं और एक F‑35 क्षतिग्रस्त हुआ है।
