नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच एक साहसिक घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। शुक्रवार को ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को दक्षिणी ईरान में मार गिराया। जेट में दो क्रू मेंबर सवार थे – एक पायलट और दूसरा वीपन्स सिस्टम ऑफिसर (कर्नल रैंक का अधिकारी)। दोनों ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई। पहले क्रू मेंबर को क्रैश के तुरंत बाद विशेष हेलीकॉप्टर मिशन से सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा कर्नल ईरान की दुर्गम पहाड़ियों में फंस गया।
ईरानी गवर्नर ने उनके सिर पर 60 हजार डॉलर का इनाम रख दिया और स्थानीय लोगों से अपील की कि अमेरिकी अधिकारी को पकड़कर सौंपें। शनिवार रात को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने अत्यंत खतरनाक कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दर्जनों लड़ाकू विमान, घातक हथियार और एयर डोमिनेंस के साथ अमेरिकी कमांडो ईरान की गहराई में घुसे।
अमेरिकी सेना ने नहीं मानी हार और कर्नल को ढूंढ निकाला
भारी गोलीबारी और मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच तीव्र फायरफाइट हुई। एक ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया गया और एक A-10 वॉर्थोग अटैक एयरक्राफ्ट समुद्र में गिरा (जिसका पायलट सुरक्षित बच गया)। इसके बावजूद अमेरिकी बलों ने हार नहीं मानी और कर्नल को ढूंढ निकाला। उन्हें कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वे अब पूरी तरह सुरक्षित हैं। ट्रंप ने घोषणा की, “WE GOT HIM! हमने दुश्मन की सरजमीं से दोनों पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में निकाला – यह सैन्य इतिहास में पहली बार हुआ।”
इस ऑपरेशन ने अमेरिकी ताकत, तकनीक और “कोई सैनिक पीछे नहीं छूटेगा” वाले सिद्धांत को एक बार फिर साबित कर दिया। ईरान की जमीन पर जाकर अपना आदमी बचाना दुनिया के लिए हैरतअंगेज रहा। ट्रंप ने इसे “एयर डोमिनेंस” का प्रमाण बताया और कहा, “GOD BLESS AMERICA!” पूरी दुनिया इस बहादुरी को देखकर दंग है।
